Monday, May 12, 2008

हिन्दी शायरी

मैं क्या कोई कविता लिखुंके मैं ख़ुद एक फ़साना बन गया हूँ
क्या ज़माने से शिकायत करूं के मैं ख़ुद गुजरा ज़माना बन गया हूँ

हस्ते हैं लोग मेरे हाल पर के मैं उनके हँसने का बहाना बन गया हूँ
तेरी जुदाई मी वो हाल के जैसे ग़मों का इकलौता ठिकाना बन गया
हूँ

तेरी मोहब्बत में यूं चलका जाता हुनके जैसे एक भरा पैमाना बन गया हूँ
सच है तो कहती है दुनिया की मैं तुम्हारा दीवाना बन गया हूँ

Monday, May 5, 2008

Radio Tarana at NZ Radio Awards